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सनातन परंपरा को जीवंत रूप देते हैं मिट्टी के दीये 

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दीपोत्सव : घर के बाहर सजाने के लिए लाइटों का क्रेज, पर अंदर दीये ही करते हैं रोशन

ब्यूरो रिपोर्ट | खगड़िया
खगड़िया शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दीपावली की तैयारी जोरों पर हैं। इस वर्ष 29 अक्टूबर को धनतेरस, 30 अक्टूबर को छोटी दिवाली और 31 अक्टूबर को दीपोत्सव मनाई जाएगी। इसके लिए मूर्तिकार लक्ष्मी-गणेश व मां काली की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दीपावली में घरों को बाहर से सजाने के लिए भले ही रंग-बिरंगी लाइटों का क्रेज है। लेकिन, घरों के अंदर आज भी मिट्टी के दीये ही रोशन करते हैं। मिट्टी के दीये सनातन से लेकर पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रूप देते हैं। दूसरी तरफ इन दीयों को भी अब कलाकार आकर्षक रूप देने में लगे हैं। इस बार बाजार में आकर्षक डिजाइन के मिट्टी के दीपक बन रहे हैं। दूसरी जगहों से भी डिमांड के अनुसार आकर्षक डिजाइन के दीये मंगाए जा रहे हैं। मूर्ति कलाकारों ने बताया कि बाजार में कितने भी चाइनीज प्रोडक्ट दीपावली को लेकर आ जाए, मिट्टी के दीये हमेशा से थे और रहेंगे। इसकी खूबसूरती के आगे चाइनीज दीये कुछ भी नहीं हैं। आज भी हर घर में पर्व-त्योहारों में मिट्टी के दीये ही जलते हैं। मांगों के अनुसार दीये बनाए जाते हैं। इस बार बाजार में करीब आधा दर्जन से अधिक डिजाइनर दीये उपलब्ध हैं। इसके अलावा बंगाल से रंग-बिरंगे दीये भी बाजार में पहुंच चुके हैं।

 

डिमांड के अनुसार बंगाल से भी मंगाए गए आकर्षक डिजाइन के दीप

70 से 80 रुपए सैकड़ा सामान्य और 10 रुपए प्रति पीस बिक रहे डिजाइनर दीये दीपावली को लेकर बाजार में अभी छोटे दीये 70 से 80 रुपए सैकड़ा की दर से बिक रहे हैं। इसके डबल साइज वाले दीये 130 से 180 रुपए सैकड़ा के हिसाब से उपलब्ध हैं। चौमुखी दीये का उपयोग दीपावली में मुख्य रूप से लक्ष्मी और काली पूजा में किया जाता है। इसकी मान्यता है कि चारों ओर प्रकाश फैलाने से घर में हमेशा खुशहाली बनी रहती है। चौमुखी डिजाइनदार दीये की कीमत 10 रुपए प्रति पीस है। ये दीये लाल मिट्टी से बने होते हैं।

 

दीपावली को लेकर कुम्हार की चाक ने पकड़ा रफ्तार

दीपावली एवं छठ पूजा को लेकर कुम्हारों की चाक ने रफ्तार पकड़ लिया है। कुम्हार दिनरात दीपावली व छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी का बर्तन, मिट्टी का चुक्का, मिट्टी का दीप, मिट्टी का हांडी, मिट्टी का चाय कप, मिट्टी का गुल्लक आदि मिट्टी का समान बनाने में जुटे हुए है। जैसे जैसे दीपावली और छठ पूजा नजदीक आ रहे हैं, वैसे वैसे उनके चाक की रफ्तार तेज होते जा रहे हैं।

 

बलहा में यहां बनाए जाते हैं दीये मिट्टी के अन्य सामग्री

बलहा पूर्णवास के देवन पंडित, सुबोध पंडित, राजू पंडित, चमरू पंडित, संजय कुमार पंडित, अजय कुमार पंडित, बनारसी पंडित, अनिल पंडित, सुनील पंडित, भीम पंडित, भूखन पंडित, शिवन पंडित, बबलू पंडित सहित दर्जनों कुम्हार समाज के लोगों ने बताया कि वे बचपन से ही इस कार्य में लगे हुए है। उन्होंने बताया कि चाक पर मिट्टी चढ़ाने से इसे बढ़िया मिट्टी में पानी देकर मुलायम किया जाता है। मिट्टी में कंकड़-पत्थर नहीं होना चाहिए, तभी जाकर दीया या बर्तन बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की वजह से उनका यह धंधा मंदा होते जा रहा है।

कीमत कम पर महत्व अधिक
कुम्हार समाज के बलहा पुनर्वास निवासी देवन पंडित ने कहा कि वर्तमान समय में प्लास्टिक आदि के तरह-तरह के बर्तन आ गए हैं। इससे मिट्टी के बर्तनों की मांग कम है। इस काम में काफी मेहनत के बावजूद मुनाफा कम है। यही वजह है कि युवा पीढ़ी इस धंधा में नहीं आना चाहते है। चाक पर बने मिट्टी के छोटे दीये की कीमत दो रुपए, चुक्का का कीमत तीन रुपए और चारमुखी और पंचमुखी दीये का कीमत 10 रुपए प्रति पीस तो उससे छोटे दीये का कीमत पांच रुपए प्रति पीस कुम्हारों ने रखी है। दीपावली मे मिट्टी का दीया जलाना शुभ माना जाता है। वही सुबोध पंडित का कहना है कि गत वर्ष पहले राष्ट्रीय स्तर पर चीन निर्मित झालर बल्ब सहित आदि के बहिष्कार के बाद कुछ उम्मीद बनी थी। लोगों ने खूब मिट्टी के दिया खरीदा था। दीपावली के पर्व में अपना खास महत्व रखने वाले मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा कम होती जा रही है। मिट्टी के दीपकों का स्थान बिजली के झालरों व मोमबत्ती ने ले ली है। आधुनिकता के दौर में क्षेत्र में भी बिजली के झालरों का प्रयोग बढ़ा है । इससे मिट्टी के बर्तन बनाने वालों की आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अपने पैतृक पेशा को बरकरार रखते हुए दीया आदि की दुकान मार्केट में लगाने के साथ साथ गांव देहात में घर घर जाकर बेचना मजबूरी हो गया हैं। वही राजेश पंडित ने कहा कि दीपावली से लेकर छठ पूजा तक में मिट्टी के दिए और बर्तन बेचकर 20 हजार से 25 हजार तक का मुनाफा हो जाता है। वही कुम्हार ने कहा कि एक ट्रैक्टर मिट्टी का कीमत दो हजार लगता है जिसमें मात्र पांच हजार दिए बनते है।और दस मन जलावन दिए को पकाने में लगता है।जिस कारण बहुत ही कम मुनाफा हो पाता है।

जनप्रतिनिधियो ने कुम्हार के लिए किया इलेक्ट्रिक चाक की मांग

मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार के लिए बलहा पंचायत के मुखिया राजेश भारती उर्फ पप्पू साह एवं बलहा वार्ड संख्य- 15 के वार्ड सदस्य सह वार्ड संघ के जिला कोषाध्यक्ष गुड्डू साह ने कहा कि बलहा पुनर्वास के दर्जनों परिवार लगभग 45 वर्ष से मिट्टी के बर्तन, दीप आदि बनाकर गुजर कर रहे है। सभी को चिन्हित कर जिला प्रशासन इलेक्ट्रिक चाक दे, ताकि कम समय में मिट्टी का सामग्री बनाया जा सके। मुखिया ने कहा कि सरकार के द्वारा चलाए जा रहे पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत सभी को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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