खगड़िया नप वार्ड-30 में बाढ़ का कहर : वृद्ध महिला समेत कई परिवार सड़क पर
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बाढ़ का कहर : कृष्णापुरी बलुआही में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से 40 से अधिक घर जलमग्न, खुले आसमान के नीचे में रात बिताने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित, वार्ड पार्षद रूबी कुमारी ने राहत और पुनर्वास की मांग की
केबीआई। खगड़िया
बाढ़ की विभीषिका ने एक बार फिर खगड़िया नगर परिषद क्षेत्र में प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। खगड़िया नगर परिषद के वार्ड नं०-30 अंतर्गत कृष्णापुरी बलुआही मोहल्ले में गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण 40 से अधिक घरों में पानी प्रवेश कर गया है। बीती रात अचानक पानी का स्तर इतना बढ़ा कि लोग सोते-सोते जाग उठे और जैसे-तैसे जरूरी सामान निकालकर घर छोड़कर भागे। एक वृद्ध महिला, जिनका घर पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है, किसी तरह अपना सामान समेटकर एम.जी. मार्ग स्थित IDBI बैंक के पास फुटपाथ पर बैठी हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन समय पर बापू मध्य विद्यालय को राहत शिविर के रूप में खोल देता, तो वह खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर नहीं होतीं। कृष्णापुरी बलुआही के लोग एक बार फिर उसी स्थिति में आ गए हैं, जहां उनके सामने सिर्फ तीन सवाल हैं –
“रहें कहां?”, “खाएं क्या?” और “बचाएं कैसे?”
जिम्मेदार प्रशासन को चाहिए कि तत्काल राहत शिविर खोले, खाद्य सामग्री वितरित करे, और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करे– ताकि पीड़ितों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।
चोरी और दुर्घटना का बना है डर
बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग केवल जलभराव से ही नहीं, बल्कि चोरी और दुर्घटनाओं के डर से भी परेशान हैं। एम.जी. मार्ग पर सामान और बच्चों को लेकर बैठे परिवारों को चिंता है कि कहीं रात के अंधेरे में कोई सामान चुरा न ले या बच्चे किसी सड़क दुर्घटना के शिकार न हो जाएं। बाढ़ प्रभावित महिलाओं का कहना है कि न तो पीने का साफ पानी उपलब्ध है और न ही खाने के लिए कोई सुविधा। बच्चे भूख से रो रहे हैं, और परिजन रात-भर जागकर उनकी रखवाली कर रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर जताई नाराज़गी
स्थानीय नगरवासी और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर कड़ी नाराज़गी जताई है। पूर्व वार्ड पार्षद रणवीर कुमार ने बताया कि प्रशासन को पहले से पता था कि जलस्तर बढ़ रहा है, फिर भी न तो राहत शिविर की व्यवस्था की गई और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा या भोजन के लिए कोई प्रबंध किया गया। वर्तमान वार्ड पार्षद रूबी कुमारी ने डीएम से अपील की है कि तुरंत राहत शिविर खोले जाएं, सूखा राशन वितरित किया जाए, और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जाए। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल भी इसी इलाके में बाढ़ आई थी, तब बापू मध्य विद्यालय में लोगों को रहने की जगह और पका-पकाया भोजन मुहैया कराया गया था।
राहत की उम्मीद में सड़क पर बेसहारा लोग
कृष्णापुरी बलुआही के लोग फिलहाल बिलकुल बेसहारा स्थिति में जी रहे हैं। जिनके पास न तो सिर पर छत है और न पेट भरने के लिए भोजन। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग धूप, बारिश और भूख में दिन गुजार रहे हैं। लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, लेकिन प्रशासन की तैयारी हर बार नाकाफी रहती है। स्थानीय समाजसेवियों ने भी आगे आकर मदद की कोशिश की है, लेकिन यह प्रयास अपर्याप्त है।
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