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राज्यरानी त्रासदी के शहीद श्रद्धालुओं की याद में उपवास

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श्रद्धांजलि सभा : फरकियावासियों ने मोमबत्तियां जलाकर दी श्रद्धांजलि, विकास व न्याय का लिया संकल्प

केबीआई। खगड़िया

धमारा घाट रेल हादसे की 12वीं बरसी पर फरकियावासियों ने मंगलवार को शहीद श्रद्धालुओं की स्मृति में एक दिवसीय उपवास रखा। 19 अगस्त 2013 को राज्यरानी एक्सप्रेस से मां कात्यानी की पूजा करने जा रहे 28 श्रद्धालु रेल प्रशासन की कुव्यवस्था के कारण कालकलवित हो गए थे। उनकी याद में आयोजित इस उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह ने की तथा संचालन शिक्षाविद् मनीष कुमार सिंह ने।

त्यागी का आक्रोश : शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि रेल प्रशासन यात्रियों की सुविधा बढ़ाने में असफल रहा है। धमारा घाट स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा तो मिला लेकिन आज भी यात्री अंधेरे और असुरक्षा में सफर करने को विवश हैं। उन्होंने कहा – “28 श्रद्धालुओं की मौत नहीं बल्कि शहादत हुई थी और उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। फरकियावासी एकजुट हो जाएं तो विकास अपने आप होगा।”

“विकास संघर्ष का प्रतिफल” – धर्मेंद्र कुमार

समाजसेवी इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि फरकिया क्षेत्र में जितना भी विकास हुआ है, वह यहां के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। हादसे के वक्त घायलों को बचाने के लिए समाज के लोग और मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं आगे आए थे, प्रशासन नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फरकिया का हर विकास यहां के लोगों के संघर्ष का प्रतिफल है।

“विदेशों से सीख ले भारत” – विवेक उमराव

अंतरराष्ट्रीय पत्रकार विवेक उमराव ने कहा कि विदेशों में ऐसे हादसों के बाद सरकारें स्मृति-चिह्न बनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देती हैं और हर वर्ष वहां जाकर नतमस्तक होती हैं। भारत में भी ऐसी परंपरा शुरू होनी चाहिए।

नेताओं पर हमला – गरीबी नहीं, गरीब मिटे

रोहियार के पैक्स अध्यक्ष साकेत सिंह बबलू ने कहा कि फरकिया के नाम पर नेताओं ने खूब राजनीति की लेकिन विकास की दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए। उन्होंने कटाक्ष किया– “आजादी के बाद से गरीबी मिटाने का नारा दिया जाता रहा, मगर गरीबी नहीं मिट सकी, गरीब जरूर मिटा दिए गए।”

    श्रद्धांजलि देकर लिया संकल्प

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने 28 मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलु अर्पित की और सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि शहीद श्रद्धालुओं की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। इस मौके पर युवा शक्ति के कार्यकारी जिला अध्यक्ष मिथुन कुमार शर्मा, जिला महासचिव अजीत कुमार पप्पू, समाजसेवी कैलाश प्रसाद वर्मा, चंद्रशेखर वर्मा, मुनेश्वर प्रसाद सिंह, चंदेश्वरी राम, दिनेश सिंह, सुरसेन कुमार, जितेंद्र यादव, रवि भूषण उर्फ कारेलाल, दिलों साव, कविता देवी, निशा देवी, उषा देवी, रामप्रवेश कुमार, अमित कुमार, धर्मेंद्र चौधरी, कुंदन कुमार, गोरेलाल सदा, अर्जुन पासवान सहित सैकड़ों फरकियावासी उपस्थित रहे।

 धमारा घाट की दो बड़ी रेल त्रासदी

👉 1981 : बागमती नदी में ट्रेन हादसा, सैकड़ों लोगों की मौत, एशिया की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना मानी गई।

👉 2013 : राज्यरानी एक्सप्रेस से पूजा करने जा रहे 28 श्रद्धालु हादसे का शिकार। फरकियावासियों के संघर्ष से स्टेशन पर ओवरब्रिज, प्लेटफार्म और सड़क निर्माण संभव हुआ।

                   संकल्प

28 श्रद्धालुओं की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। फरकिया के विकास और सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
नागेंद्र सिंह त्यागी 

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