राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर खगड़िया की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पुरज़ोर मांग
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अच्छी पहल : मां कात्यायनी, बड़ी कात्यायनी (तीनगछिया), कसरैया धार एवं बाबन कोठरी-तिरपन द्वार को पर्यटन मानचित्र पर लाने की ज़ोरदार अपील
KBI, KHAGARIA
राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर युवा शक्ति के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, खगड़िया से जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों को राज्य एवं राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की औपचारिक घोषणा करने तथा विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने की पुरज़ोर मांग की है। उन्होंने कहा कि खगड़िया जिला सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने के बावजूद आज भी पर्यटन के क्षेत्र में उपेक्षित है, जो जिले के समग्र विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है। त्यागी ने मां कात्यायनी स्थान को खगड़िया की प्रमुख धार्मिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह स्थल कोसी-सीमांचल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में आस्था का बड़ा केंद्र है। वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आगमन होता है, विशेषकर नवरात्रि जैसे पर्वों पर भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। इसके बावजूद सड़क, पार्किंग, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और ठहराव जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। तीनगछिया स्थित बड़ी कात्यायनी स्थान के संबंध में उन्होंने कहा कि यह स्थल ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यहां सुनियोजित ढंग से सौंदर्यीकरण, मंदिर परिसर का विकास, यात्री सुविधाओं का विस्तार और व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कसरैया धार को खगड़िया की एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह स्थल पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कसरैया धार के विकास हेतु बिहार सरकार द्वारा पूर्व में करोड़ों रुपये की राशि आवंटित की गई थी, परंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक उस आवंटन के अनुरूप कोई ठोस कार्य धरातल पर नहीं दिखता। यह स्थिति न केवल सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात भी है। उन्होंने मांग की कि आवंटित राशि के उपयोग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और शीघ्र कसरैया धार को विकसित करने का कार्य प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कसरैया धार में पक्की सड़क, घाट निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, नाव विहार एवं पर्यटक सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है और खगड़िया की पहचान को नई ऊंचाई देगा। नागेंद्र सिंह त्यागी ने बाबन कोठरी-तिरपन द्वार को खगड़िया की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह स्थल जिले के गौरवशाली अतीत का साक्षी है। दुर्भाग्यवश यह धरोहर आज उपेक्षा की शिकार है। इसके संरक्षण, जीर्णोद्धार और ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप विकास की तत्काल आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास से केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। होटल, लॉज, परिवहन, गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान एवं छोटे व्यापारों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। इससे खगड़िया जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। नागेंद्र सिंह त्यागी ने बिहार सरकार से मांग की कि खगड़िया की इन धरोहरों को पर्यटन विभाग की प्राथमिक योजनाओं में शामिल कर स्पष्ट एवं सार्वजनिक घोषणा की जाए। साथ ही विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट आवंटित कर समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराया जाए। जिला प्रशासन से भी उन्होंने अपेक्षा की कि वह पर्यटन विकास को लेकर एक ठोस, पारदर्शी और जवाबदेह कार्ययोजना तैयार करे। राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ईमानदार इच्छाशक्ति के साथ पहल करें, तो खगड़िया भी बिहार के प्रमुख पर्यटन जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है और आने वाले वर्षों में यहां देश-विदेश से पर्यटक आएंगे।
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