खगड़िया में शोक की लहर: नहीं रहे समाजसेवी ‘गोपाल बाबू’
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शोक : पर्यावरण, गांव और बच्चों से गहरा जुड़ाव, 89 वर्ष की आयु में निधन
केबीआई। खगड़िया
सदर प्रखंड के रहीमपुर मध्य पंचायत अंतर्गत दुर्गापुर गांव निवासी समाजसेवी कृष्ण शंकर प्रसाद सिंह उर्फ ‘गोपाल बाबू’ का मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को टीचर्स कॉलोनी स्थित आवास पर 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। वे अपने आठ भाइयों में चौथे स्थान पर थे और अपने पीछे तीन पुत्रियों एवं इकलौते पुत्र प्रदुम्न सिंह सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गोपाल बाबू का जीवन सादगी, सामाजिक चेतना और प्रकृति प्रेम का अनूठा उदाहरण रहा। वे गांव की स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को लेकर हमेशा सजग रहते थे। उनका मानना था कि स्वस्थ समाज के निर्माण में स्वच्छ पर्यावरण और संस्कारित बच्चों की अहम भूमिका होती है।
बच्चों से विशेष लगाव, शिक्षा को दिया महत्व
बच्चों के प्रति उनके विशेष स्नेह का असर उनके परिवार में भी दिखता है। उनके पुत्र प्रदुम्न सिंह, जो बचपन प्ले स्कूल के डायरेक्टर हैं, बच्चों के बीच शिक्षा और संस्कार को जोड़ने के लिए जाने जाते हैं। पिता के निधन पर प्रदुम्न सिंह ने भावुक होकर कहा कि “पिता जी की प्रेरणा ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने सिखाया कि गांव और बच्चों से जुड़ाव ही सच्ची संपत्ति है।”
किसान हित में निभाई सक्रिय भूमिका
गोपाल बाबू ने पैक्स अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करते हुए किसानों के हित में कई पहल की। उन्होंने आधुनिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को जागरूक करने और सामूहिक सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वार्षिकोत्सव के बीच छाया मातम
बताया जाता है कि 25 फरवरी को बचपन प्ले स्कूल का वार्षिकोत्सव आयोजित होना था। कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन इस दुखद समाचार से विद्यालय परिवार शोक में डूब गया। गोपाल बाबू का निधन केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और ग्रामीण चेतना के एक युग का अंत है। उनके विचार और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
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