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14 किमी तटबंध निर्माण की उठी जोरदार मांग, चेतावनी—अनदेखी हुई तो छेड़ा जाएगा व्यापक आंदोलन

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गंगा कटाव से त्रस्त दियारा में जनसैलाब: हजारों महिलाओं ने किया गंगा पूजन, उपवास रख जताया शांतिपूर्ण विरोध

रौशन कुमार | खगड़िया 
गंगा के लगातार बढ़ते कटाव से तबाही झेल रहे खगड़िया जिले के दियारा क्षेत्र में अब आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को रहीमपुर दक्षिणी पंचायत स्थित माथार नाव घाट पर कटाव पीड़ित परिवारों द्वारा गंगा पूजन सह एकदिवसीय उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भाग लेकर अपनी पीड़ा और आक्रोश को स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सरपंच शिवनंदन यादव ने की, जबकि मंच संचालन रामपुर गोगरी के मुखिया कृष्णानंद यादव ने किया। सुबह से ही घाट पर श्रद्धा और संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिला। सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान से गंगा पूजन किया और हाथ जोड़कर गंगा मां से करुण विनती की—“हे मां, अब लौट जाइए… हमारे आशियाने, खेत-खलिहान और भविष्य को बचा लीजिए।” यह दृश्य न सिर्फ भावुक करने वाला था, बल्कि सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश भी था। कटाव पीड़ितों ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि दियारा क्षेत्र को विनाश से बचाने के लिए अविलंब 14 किलोमीटर लंबा बंडाल (तटबंध) बनाया जाए। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिले के रघुनाथपुर बरारी, टीकारामपुर, मध्य रहीमपुर, उत्तरी रहीमपुर और दक्षिणी रहीमपुर पंचायतों के गांव और हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाएंगे।

सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई करे। “हमारी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा,” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी।आंदोलन के प्रमुख नेता और युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने अपने जोशीले संबोधन में कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी विचारधारा पर निर्भर करती है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अहिंसक आंदोलनों ने ही देश को दिशा दी है—चाहे आजादी की लड़ाई हो, जयप्रकाश आंदोलन हो या अन्ना हजारे का जनआंदोलन। उन्होंने भरोसा जताया कि गंगा कटाव के खिलाफ यह लड़ाई भी शांतिपूर्ण तरीके से लड़ी जाएगी और अंततः पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने गंगा मां को साक्षी मानकर सामूहिक संकल्प लिया कि वे इस आंदोलन को तन, मन और धन से समर्थन देंगे और तब तक संघर्ष जारी रखेंगे, जब तक कटाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता। इस अवसर पर जनार्दन यादव, मनोहर यादव, सुमित कुमार चौधरी, सुभाष चंद्र जोशी, संजय यादव, उमेश प्रसाद सिंह, ललित चौधरी, पांडव यादव, मक्खन साह, योगेंद्र प्रसाद यादव, आशुतोष यादव, बबलू यादव, सरजू यादव, सूर्यनारायण यादव, अधिवक्ता गोपाल मंडल, शंकर यादव, देवन यादव, सिंटू पासवान, प्रफुलचंद्र घोष, अरविंद यादव, साहब यादव, शशि पासवान, उदय यादव, प्रमोद यादव समेत हजारों ग्रामीणों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जनआंदोलन का रूप दे दिया।

निष्कर्ष: 👇👇👇

गंगा कटाव अब सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि दियारा क्षेत्र के अस्तित्व पर मंडराता गंभीर संकट बन चुका है। लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। यदि समय रहते ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह शांतिपूर्ण विरोध जल्द ही एक बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है, जिसकी गूंज सत्ता के गलियारों तक सुनाई देगी।

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