15.36 लाख की वसूली पर हाईकोर्ट की बड़ी चोट! प्रशासनिक आदेश पर लगी रोक, जांच के आदेश से मचा हड़कंप
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हाईकोर्ट का निर्देश : ‘बिना आधार वसूली नहीं’: कोर्ट ने दिखाई सख्ती, विश्वविद्यालय को निष्पक्ष जांच का निर्देश
KBI, KHAGARIA
न्याय और पारदर्शिता के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पटना उच्च न्यायालय ने 15 लाख 36 हजार रुपये की कथित वसूली के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता अभय कुमार उर्फ गुड्डू द्वारा दायर दीवानी रिट याचिका (CWJC 1296/2026) से जुड़ा है, जिसने स्थानीय प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि बिना ठोस दस्तावेज और स्पष्ट विवरण के किसी भी नागरिक पर इतनी भारी आर्थिक देनदारी थोपना न्यायसंगत नहीं है। यह विवाद खगड़िया के अनुमंडल पदाधिकारी सह भूमि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष द्वारा जारी वसूली आदेश से जुड़ा है।
👉 राज्य सरकार बैकफुट पर, बोली—आदेश पहले ही हो चुका स्थगित
मामले की सुनवाई में राज्य पक्ष ने कोर्ट को बताया कि संबंधित वसूली आदेश को पहले ही स्थगित किया जा चुका है। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि राशि की वसूली के निर्देश विश्वविद्यालय स्तर से प्राचार्य को दिए गए थे—जिससे पूरे मामले में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होने की संभावना बढ़ गई है।

👉 अब होगी गहराई से जांच, 3 सदस्यीय कमेटी गठित करने का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि कम से कम तीन वरिष्ठ अधिकारियों की स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। यह कमेटी खगड़िया के अवध बिहारी संस्कृत कॉलेज, रहीमपुर में हुए पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत जांच करेगी और यह तय करेगी कि आखिर किसकी भूमिका संदिग्ध है और किस पर जिम्मेदारी तय होगी।

👉 प्राचार्य पर भी जिम्मेदारी, देना होगा शपथ-पत्र
कोर्ट ने महाविद्यालय के प्राचार्य को भी अलग से शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें पूरे मामले का विस्तृत ब्यौरा देना होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि आखिर किन हालातों में यह विवाद इतना बढ़ा कि मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

👉 तय समयसीमा में होगा फैसला: 6 माह में जवाब, 1 साल में निपटारा
कोर्ट ने सख्त समयसीमा तय करते हुए सभी पक्षों को 6 महीने के भीतर जवाब दाखिल करने और 1 वर्ष के अंदर मामले के अंतिम निपटारे की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
👉 “सत्य की होगी जीत”: अधिवक्ता और याचिकाकर्ता का भरोसा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कोर्ट का यह आदेश कानून के राज को मजबूत करता है और मनमानी पर रोक लगाने वाला है।
वहीं अभय कुमार गुड्डू ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई तय होगी।
बड़ी बात 👇👇👇
यह मामला अब सिर्फ एक वसूली विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। हाईकोर्ट की सख्ती से यह साफ संकेत गया है कि बिना ठोस आधार के किसी भी नागरिक पर आर्थिक दबाव बनाना अब आसान नहीं होगा।
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