जिले के ज्वलंत सवालों पर डीएम से मिला जनप्रतिनिधियों का शिष्टमंडल
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सवाल : धरना स्थल, स्मैक का बढ़ता जाल, मेडिकल कॉलेज प्रकरण और भदास कांड पर प्रशासन से सीधे सवाल, दिया ज्ञापन 
KBI, KHAGARIA
जिले में लगातार गहराते सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त शिष्टमंडल डीएम नवीन कुमार से मिला। शिष्टमंडल ने जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को मजबूती के साथ उठाते हुए उनके अविलंब समाधान की मांग की। शिष्टमंडल का नेतृत्व जनहित में मुखर भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी समाजसेवी एवं युवा शक्ति के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने किया। प्रतिनिधिमंडल में राजद जिलाध्यक्ष मनोहर यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार पासवान, स्वराज इंडिया के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह, शिक्षक नेता मनीष कुमार सिंह, पूर्व वार्ड पार्षद रणवीर कुमार, रालोजपा जिलाध्यक्ष शिवराज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष प्रिंस कुमार, रालोमो जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह, वीआईपी नेता रवि कुमार रजक, सामाजिक कार्यकर्ता व उद्यमी सुमन कुमार पटेल, अमरीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखरम सहित कई प्रबुद्धजन शामिल थे।
धरना स्थल का मुद्दा: लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट का आरोप
शिष्टमंडल ने सबसे पहले धरना स्थल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्षों से समाहरणालय के समक्ष धरना स्थल निर्धारित रहा है, जिससे आम नागरिक और जनप्रतिनिधि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाते रहे हैं। अब तक किसी भी धरना-प्रदर्शन के दौरान समाहरणालय परिसर में अराजकता या सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ है, यह सर्वविदित है। शिष्टमंडल ने कहा कि यदि किसी एक असामाजिक व्यक्ति ने अलोकतांत्रिक कृत्य किया है तो उसकी सजा पूरे समाज और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को देना न्यायसंगत नहीं है। असामाजिक तत्वों की वजह से लोकतांत्रिक आवाज को दबाना लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। इसलिए हर हाल में एक सुलभ और स्थायी धरना स्थल चिह्नित किया जाए।
सूखा नशा (स्मैक) बना नस्ल विनाश का कारण
शिष्टमंडल ने जिले में तेजी से फैल रहे सूखा नशा (स्मैक) पर गहरी चिंता जताई। नेताओं ने कहा कि आज जिले के बच्चे और युवा इस नशे की गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यह स्थिति अब केवल सामाजिक नहीं बल्कि नस्ल विनाश की ओर बढ़ती प्रतीत हो रही है। शिष्टमंडल ने बताया कि बढ़ते अपराधों के पीछे स्मैक का बड़ा हाथ है। हालात यह हैं कि युवा 5–10 हजार रुपये की सुपारी लेकर हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पकड़े गए अपराधियों के बयानों से भी यही सामने आ रहा है। नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन शराब के खिलाफ तो सक्रिय रहता है, लेकिन सूखा नशा पर सरकार की ओर से स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने का हवाला देकर कार्रवाई से बचता रहा है।
श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज प्रकरण: साजिश का आरोप
श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज के संस्थापक डॉ. विवेकानंद, संचालक इंजीनियर धर्मेंद्र एवं उनके पूरे परिवार पर कथित रूप से दर्ज फर्जी मुकदमे का मुद्दा भी शिष्टमंडल ने जोरदार तरीके से उठाया। नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोगों की साजिश के तहत एक बच्ची को मोहरा बनाकर कॉलेज की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। शिष्टमंडल ने कहा कि जिले के सैकड़ों लोग इस बात के साक्षी हैं कि कॉलेज प्रबंधन ने कम खर्च में कई गरीब बच्चों का भविष्य संवारा है। आज श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज खगड़िया जिले का गौरव है। ऐसे में इसकी निष्पक्ष जांच कर जिले को बदनाम होने से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
भदास कांड: एफआईआर में राजनीतिकरण का आरोप
भदास में बच्ची के साथ हुई घटना के बाद हुए उग्र प्रदर्शन को शिष्टमंडल ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की। शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी में भारी राजनीतिकरण किया गया, जिससे प्रशासन की न्यायिक मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। नेताओं ने कहा कि आनन-फानन में पुलिस पदाधिकारियों को प्रभावित कर व्यक्तिगत विरोधियों को नामजद किया गया। प्राथमिकी में नामित 20–25 लोग ऐसे हैं जो घटना के समय या तो जिले से बाहर थे या फिर प्रशासन को सहयोग कर रहे थे, बावजूद इसके उन्हें भी आरोपी बना दिया गया। शिष्टमंडल ने मांग की कि जांच के बाद निर्दोष लोगों को अविलंब मुक्त किया जाए।
डीएम का आश्वासन: स्मैक पर सख्ती, धरना स्थल तय होगा
शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कई अहम आश्वासन दिए।
उन्होंने कहा कि— फरवरी से स्मैक के खिलाफ ठोस और विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, हालांकि इसमें समाज के सहयोग के बिना सफलता संभव नहीं है। धरना-प्रदर्शन के लिए स्थायी स्थल बहुत जल्द अधिकारियों से विचार-विमर्श कर तय किया जाएगा। श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज मामले में निष्पक्ष जांच होगी, किसी भी सूरत में खगड़िया को कलंकित नहीं होने दिया जाएगा। भदास घटना में नामजद निर्दोष लोगों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुक्त किया जाएगा। दोषियों पर तीन माह के भीतर स्पीडी ट्रायल चलाकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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