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दियारा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा कटाव, 25 हजार एकड़ खेती भी संकट में

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गंगा कटाव का कहर: 70 हजार आबादी पर मंडराया खतरा, खगड़िया डीएम को सौंपा गया ज्ञापन

KBI, KHAGARIA 
गंगा नदी के लगातार बढ़ते कटाव ने दियारा क्षेत्र में भयावह स्थिति पैदा कर दी है। इस गंभीर समस्या को लेकर कटाव प्रभावित इलाकों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का एक शिष्टमंडल डीएम खगड़िया से मिला और विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए अविलंब ठोस एवं स्थाई समाधान की मांग की। शिष्टमंडल ने डीएम को क्षेत्र की जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए बताया कि खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिलों के सीमावर्ती दियारा क्षेत्रों में गंगा का कटाव लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। इससे करीब 70 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है, जबकि 20 से 25 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि भी गंगा में समाने की कगार पर है।

कई पंचायतों पर मंडराया अस्तित्व का संकट
ज्ञापन में खगड़िया जिले के दक्षिणी, मध्य एवं उत्तरी रहीमपुर पंचायत, बेगूसराय के रघुनाथपुर बरारी पंचायत तथा मुंगेर के टीकारामपुर पंचायत को अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र बताया गया। यहां के लोगों का जीवन असुरक्षा और अनिश्चितता के साये में गुजर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटाव का डर उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, जिससे उनका भविष्य लगातार अस्थिर बना हुआ है।

2018 की योजना बनी उम्मीद, पर लापरवाही से नहीं मिला स्थाई समाधान
शिष्टमंडल ने वर्ष 2018 में सरकार द्वारा 70 से 80 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए कटाव निरोधी कार्यों का उल्लेख किया। उस समय यह योजना क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण बनी थी, लेकिन विभागीय लापरवाही, निगरानी की कमी और असामाजिक तत्वों की वजह से यह प्रयास स्थायी समाधान साबित नहीं हो सका। इसके बावजूद, ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि उस योजना के कारण कई पंचायतें पूरी तरह समाप्त होने से बच गईं और इसके लिए सरकार के प्रति आभार भी जताया।

NH-31 तक पहुंच सकता है गंगा का प्रवाह, बड़ा खतरा
प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि वर्तमान में कटाव की रफ्तार अत्यंत तेज है और यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले 3 से 4 वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। यहां तक आशंका जताई गई कि गंगा का प्रवाह राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के करीब पहुंच सकता है, जो क्षेत्रीय स्तर पर बड़े संकट को जन्म दे सकता है।

स्कूल, आंगनबाड़ी और पेयजल योजनाएं भी खतरे में
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि क्षेत्र में स्थित कई सरकारी संपत्तियां—प्राथमिक, मध्य एवं इंटर विद्यालय, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और पेयजल टंकियां—कटाव की जद में हैं। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो ये सभी संरचनाएं गंगा में समा सकती हैं, जिससे सरकारी संसाधनों का भारी नुकसान होगा और ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाएं खत्म हो जाएंगी।

80 वर्षों से झेल रहे विस्थापन का दर्द
ग्रामीणों ने बताया कि दियारा क्षेत्र के लोग पिछले करीब 80 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और बार-बार कटाव व विस्थापन की त्रासदी झेलते आ रहे हैं।
कटाव के बाद लोगों को फिर से शून्य से जीवन शुरू करना पड़ता है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद कष्टदायक स्थिति है।

स्थाई समाधान की मांग, प्रशासन ने दिया आश्वासन
शिष्टमंडल ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि कटाव रोकने के दो ही उपाय संभव हैं—या तो गंगा अपना रास्ता बदल ले (जो व्यावहारिक नहीं), या सरकार वैज्ञानिक और ठोस उपायों से कटाव को नियंत्रित करे। प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि इस मुद्दे को प्राथमिकता पर लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान की योजना बनाई जाए और सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए। साथ ही तत्काल राहत और अस्थाई सुरक्षा उपाय भी लागू करने की मांग की गई। डीएम ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि इस समस्या को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिष्टमंडल में कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल
इस शिष्टमंडल का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता ई. धर्मेंद्र कुमार, नागेंद्र सिंह त्यागी एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य कृष्ण कुमार कर रहे थे। शिष्टमंडल में जितेंद्र यादव, संजय यादव, मक्खन साह, प्रद्युमन सिंह, सुमित चौधरी, मुकेश यादव, मौसम कुमार गोलू, अरुण यादव, मनोज यादव, उमेश यादव, आमोद यादव, घनश्याम कुमार, नागेश्वर यादव, रमाकांत दास, विजय कुमार, राकेश पासवान शास्त्री, बबलू यादव, वीर प्रकाश यादव, सदानंद यादव सहित कई लोग शामिल थे।

गंगा कटाव अब प्राकृतिक नहीं, मानवीय संकट
अंत में शिष्टमंडल ने कहा कि गंगा कटाव अब केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए, तो हजारों परिवारों का जीवन और भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है, अन्यथा यह संकट आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकता है।

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