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कोशी और गंगा के कटाव से बचाव के लिए सांसद ने लोकसभा में उठाई मांग

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अच्छी पहल : स्थाई समाधान के लिए विशेष पहल की आवश्यकता: सांसद राजेश वर्मा

केबीआई|खगड़िया 

खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा ने गुरुवार को लोकसभा में कोशी, गंगा और बागमती नदी के भीषण कटाव के स्थाई समाधान के लिए सरकार से विशेष पहल करने की मांग की। उन्होंने सदन में खगड़िया, सहरसा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे कटाव का उल्लेख करते हुए कहा कि हर साल अस्थायी समाधान किए जाते हैं, लेकिन स्थायी निदान अब तक नहीं हुआ है। सांसद वर्मा ने गोगरी प्रखंड के पैकांत पंचायत के बीरबास गांव का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां कई वर्षों से कोशी नदी का भीषण कटाव हो रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों की जमीन नदी में समा गई है। उन्होंने कहा कि बलतारा पंचायत के बड़ी फुलवरिया और लौंगा में भी कोशी नदी का प्रकोप जारी है। यदि समय रहते बंडाल (कटाव रोकने वाला बांध) का निर्माण नहीं किया गया, तो यहां की आबादी और कृषि भूमि दोनों नष्ट हो जाएंगे।

 

सहरसा जिले में भी कोशी का कहर, घोघशम और बछोर गांव में कटाव जारी

सांसद ने सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के घोघशम और महिषी प्रखंड के नहरवार पंचायत के बछोर गांव का जिक्र करते हुए कहा कि इन इलाकों में भी लगातार कटाव हो रहा है, जिससे सैकड़ों परिवार विस्थापित हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से स्थायी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सांसद वर्मा ने कहा कि अलौली प्रखंड के चेरा खेड़ा पंचायत के उत्तरी बोहरवा, हरदिया और बलुआही में भी भयावह कटाव हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल, उपस्वास्थ्य केंद्र और सैकड़ों घर कोशी की धारा में समा चुके हैं। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो पूरी आबादी कोशी में समा जाएगी।

 

रहीमपुर दक्षिणी पंचायत में गंगा के कटाव से हजारों लोग प्रभावित

खगड़िया प्रखंड के रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के मथार दियारा की स्थिति भी बेहद गंभीर बताई गई। यह क्षेत्र गंगा नदी के किनारे बसा है और यहां 10,000 से अधिक की आबादी कटाव के खतरे में है। सांसद ने कहा कि पहले बंडाल का निर्माण किया गया था, लेकिन अब वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। उन्होंने सरकार से नई तकनीक से बंडाल के पुनर्निर्माण की मांग की, ताकि लोगों के घर और कृषि भूमि बचाई जा सके। सांसद वर्मा ने सरकार से अनुरोध किया कि इन सभी प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए विशेष योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि हर साल तात्कालिक उपाय किए जाते हैं, लेकिन स्थायी हल न होने के कारण हजारों परिवारों को बार-बार विस्थापन का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय और केंद्र सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की।

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