बिहार पंचायत चुनाव अगले साल: नए परिसीमन के बाद बदलेगा गांवों की राजनीति का पूरा गणित
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👉👉पंचायत चुनाव अपडेट : 2011 की जनगणना के आधार पर होगा त्रिस्तरीय पंचायतों का पुनर्गठन, चुनाव 2027 के जुलाई-अगस्त में होने की संभावना
👉👉बिहार पंचायत चुनाव पर फिलहाल ब्रेक: अब 2027 में बजेगा चुनावी बिगुल, बदलेंगे गांवों के चुनावी नक्शे
कुमार द्रवेश। पटना
बिहार के पंचायत प्रतिनिधियों और चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे दावेदारों के लिए बड़ी खबर है। इस साल होने वाले पंचायत चुनाव अब अगले वर्ष कराए जाएंगे। राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं का नए सिरे से परिसीमन कराने का फैसला लिया है। इसके साथ ही गांवों की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। सरकार के निर्णय के अनुसार अगस्त 2026 से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी, जो अप्रैल 2027 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग नई मतदाता सूची, आरक्षण और चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। ऐसे में पंचायत चुनाव जुलाई-अगस्त 2027 में होने के आसार हैं।
बदल जाएंगे चुनावी समीकरण
नए परिसीमन के बाद कई पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी। कुछ वार्ड समाप्त हो सकते हैं तो नए वार्ड भी बनाए जाएंगे। कई पंचायतों का क्षेत्रफल और मतदाताओं की संख्या बदलने से मौजूदा जनप्रतिनिधियों का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। जिन नेताओं ने अपने क्षेत्र में चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी, उन्हें अब नई रणनीति बनानी होगी।
आरक्षण का भी बदलेगा गणित
परिसीमन के बाद पंचायतों और वार्डों में आरक्षण का नया निर्धारण किया जाएगा। इससे कई सीटों का वर्ग बदल सकता है। ऐसे में जो सीट आज सामान्य है, वह आरक्षित हो सकती है और आरक्षित सीट सामान्य श्रेणी में आ सकती है। इसका सीधा असर हजारों संभावित उम्मीदवारों की चुनावी योजनाओं पर पड़ेगा।
एक साल और करना होगा इंतजार
चुनाव टलने से वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ने की संभावना है। इस दौरान विकास योजनाओं का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा ताकि ग्रामीण विकास के कार्य प्रभावित न हों।
2011 की जनगणना बनेगी आधार
सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार पंचायतों का पुनर्गठन करेगी। उद्देश्य यह है कि आबादी के अनुपात में सभी क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिले और पंचायत व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
गांवों में फिर गर्म होगी सियासत
चुनाव भले एक साल आगे बढ़ गया हो, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी अब और तेज होने की उम्मीद है। नए परिसीमन और संभावित आरक्षण बदलाव के कारण गांव-गांव में नई राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू होगी। कई पुराने चेहरे नए क्षेत्र तलाशेंगे तो नए दावेदारों को भी चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिलेगा। ऐसे में 2027 का पंचायत चुनाव अब तक का सबसे दिलचस्प और सबसे चुनौतीपूर्ण चुनाव साबित हो सकता है।
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