भारत छोड़ो आंदोलन के अमर शहीद धन्ना-माधव को भावभीनी श्रद्धांजलि
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
आयोजन : मानसी स्टेशन स्थित शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर किया गया नमन
केबीआई। खगड़िया
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में “भारत छोड़ो आंदोलन” (1942) एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। इस आंदोलन के दौरान देशभर में स्वतंत्रता की ज्वाला धधक उठी थी और इस ज्वाला में बिहार के खगड़िया जिले स्थित मानसी के दो वीर सपूत शहीद धन्ना और माधव ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी जान की बाज़ी लगाकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इन्हीं अमर शहीदों की स्मृति में बुधवार को मानसी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत धन्ना माधव अमर रहे के नारे के साथ हुई, जिसके पश्चात सभी गणमान्य अतिथियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। शहीद धन्ना-माधव की याद में लोगों ने मोमबत्तियां जलाईं और “जय हिंद”, “भारत माता की जय”, “शहीदों अमर रहें” के नारों से वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। श्रद्धांजलि सभा के आयोजन में उपस्थित नगर पंचायत मानसी के उप मुख्य पार्षद पप्पू कुमार सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद धन्ना और माधव न केवल खगड़िया के गौरव हैं, बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए प्रेरणा के श्रोत है। वहीं नशामुक्त भारत के संस्थापक प्रेम कुमार यशवंत ने कहा कि उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों को आत्मसात करें और अपने युवाओं को देशसेवा की प्रेरणा दें। सभा को संबोधित करते हुए जिला फुटबॉल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अभय कुमार गुड्डू ने कहा कि शहीद धन्ना-माधव की शहादत हमें याद दिलाती है कि आज़ादी हमें कितने संघर्षों और बलिदानों के बाद मिली है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि उनकी कुर्बानी व्यर्थ न जाए और हम एक समृद्ध, शिक्षित और जागरूक भारत का निर्माण करें। युवाओं को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन बेहद जरूरी है। हमें इतिहास के उन पन्नों को याद करना चाहिए जो हमें हमारे स्वाभिमान और पहचान से जोड़ते हैं। धन्ना-माधव स्मारक निर्माण समिति के महासचिव सिकंदर आजाद वक्त, युवा शक्ति के जिला महासचिव अजीत कुमार पप्पू, युवा शक्ति मानसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र पोद्दार, युवा शक्ति के मानसी नगर अध्यक्ष अमन राजपूत, गुड्डू कुमार यादव, राहुल यादव ने अपने अनुभव साझा किए। उस दौर की घटनाओं को याद करते हुए बताया कि कैसे 1942 में युवाओं ने ट्रेन की पटरियां उखाड़ी थीं। ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला था और अपने प्राणों की आहुति दी थी। शहीद धन्ना और माधव भी इन्हीं कार्यों में सक्रिय थे और अंग्रेज सैनिकों द्वारा गोली मारे जाने के कारण वीरगति को प्राप्त हुए। आज़ादी के सच्चे मायनों को समझना और उसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। जब-जब हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं, तब-तब हम इतिहास से जुड़ते हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। मानसी का यह छोटा-सा स्टेशन जहां कभी अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका गया था, आज भी शहीद धन्ना और माधव के बलिदान की गाथा सुनाता है।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space


