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दियारा में कटाव के खिलाफ बिगुल, बंडाल निर्माण की मांग पर एकजुट हुए पांच पंचायतों के किसान

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जनसमर्थन : वर्षों से बाढ़ और गंगा कटाव का दंश झेल रहे दियारा क्षेत्र में जनजागरण तेज, गांव और जमीन बचाने की लड़ाई को लेकर बढ़ रहा जनसमर्थन

KBI, KHAGARIA 

दियारा क्षेत्र में वर्षों से तबाही का पर्याय बने गंगा कटाव के खिलाफ अब ग्रामीणों ने निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। बाढ़ और कटाव को अपनी नियति मान चुके लोग अब अपने अस्तित्व, गांव और खेती योग्य जमीन को बचाने के लिए संगठित हो रहे हैं। बंडाल निर्माण के माध्यम से गंगा कटाव पर स्थायी रोक लगाने की मांग को लेकर पांच पंचायतों के किसानों और ग्रामीणों में अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिल रही है। खगड़िया और आसपास के दियारा क्षेत्र के मथार, बरखंडी टोला, टीकारामपुर, रहीमपुर समेत कई गांव वर्षों से गंगा और बूढ़ी गंडक की विनाशकारी धारा का दंश झेलते आ रहे हैं। हर वर्ष सैकड़ों परिवारों का आशियाना उजड़ता है, हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो जाती है और लोगों को विस्थापन की पीड़ा सहनी पड़ती है। पशुपालकों की जीविका प्रभावित होती है तथा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का भविष्य असुरक्षित हो जाता है। हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। जहां पहले लोग कटाव को सामूहिक समस्या मानकर केवल चिंता जताते थे, वहीं अब हर व्यक्ति इसे अपनी व्यक्तिगत लड़ाई मानकर आगे आने लगा है। बंडाल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों के बीच व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, नागेंद्र सिंह त्यागी, कृष्णा मुखिया, कृष्ण कुमार उर्फ मुन्ना यादव सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने जनजागरण की ऐसी अलख जगाई है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण अब कटाव रोकने के लिए हर स्तर पर संघर्ष को तैयार दिखाई दे रहे हैं। इस अभियान को संगठित स्वरूप देने में सामाजिक चिंतक और विकास पुरुष के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. स्वामी विवेकानंद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वयं कटाव और विस्थापन का दर्द झेल चुके डॉ. विवेकानंद ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया और बंडाल निर्माण को लेकर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की पहल शुरू की। उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास भी किया। मथार में आयोजित पहली बैठक ने इस आंदोलन की नींव रखी। बैठक के बाद गंगा तट पर एक दिवसीय उपवास सह गंगा पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों ने यह संदेश दिया कि अब वे अपने गांव और जमीन को बचाने के लिए एकजुट हैं। इसके बाद मुंगेर जिले के टीकारामपुर में भी बैठक और जनजागरण अभियान चलाया गया। यहां आयोजित एक दिवसीय उपवास सह गंगा पूजन कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं, किसानों, मजदूरों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सभी ने एक स्वर में गंगा कटाव रोकने के लिए बंडाल निर्माण की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कई गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। इसलिए अब लोग अपने अधिकार और भविष्य की रक्षा के लिए संगठित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बंडाल निर्माण नदी की धारा को नियंत्रित करने और कटाव प्रभावित तटों की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। इसी विश्वास के साथ ग्रामीण लगातार सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान किसी राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि आम लोगों की पीड़ा और जनभावनाओं से उपजा आंदोलन है। यही कारण है कि इसकी स्वीकार्यता और समर्थन लगातार बढ़ रहा है। आज पांच पंचायतों के लोग एक साझा मंच पर आकर अपने गांव, अपनी जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने का संकल्प ले चुके हैं। दियारा क्षेत्र में बढ़ती एकजुटता और बंडाल निर्माण को लेकर उठती मजबूत मांग इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में गंगा कटाव के खिलाफ एक व्यापक और ऐतिहासिक जनआंदोलन आकार ले सकता है। वर्षों की निराशा के बीच अब उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।

कटाव से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
मथार
बरखंडी टोला
टीकारामपुर
रहीमपुर
आसपास के दियारा गांव

मुख्य मांग
गंगा कटाव रोकने के लिए शीघ्र बंडाल निर्माण
प्रभावित गांवों और कृषि भूमि की सुरक्षा
स्थायी कटाव निरोधी योजना लागू करना

जनआंदोलन की विशेषता
ग्रामीणों की स्वतः स्फूर्त भागीदारी
उपवास, गंगा पूजन और जनजागरण कार्यक्रम
पांच पंचायतों के लोगों की साझा लड़ाई
गांव और जमीन बचाने का सामूहिक संकल्प

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