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खगड़िया की बेटी दुर्गा ने बाल विवाह के खिलाफ दिखाई जंग, राष्ट्रीय मंच पर हुई सम्मानित

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मिसाल : ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के शुभारंभ पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया सम्मान, दुर्गा बनीं सामाजिक बदलाव की प्रतीक

केबीआई| खगड़िया

खगड़िया जिले की 15 वर्षीय दुर्गा ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से देशभर में मिसाल पेश की है। दुर्गा ने न केवल अपनी बल्कि अपनी बहन की भी शादी रुकवाई, जो उनके माता-पिता ने सामाजिक दबाव में तय की थी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने दुर्गा के इस साहसिक कदम को सराहा और उन्हें ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में 1 दिसंबर को सम्मानित किया। यह अभियान पूरे देश को बाल विवाह की प्रथा से मुक्त करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। दुर्गा, जो एक दैनिक मजदूर की बेटी हैं, ने बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में अपनी शिक्षा और जागरूकता को हथियार बनाया। जब उनके माता-पिता ने दुर्गा और उनकी बहन लक्ष्मी की शादी तय की, तो दुर्गा ने इसे चुनौती देने का फैसला किया। उन्होंने बाल विवाह निषेध अधिनियम का सहारा लिया और पंचायत प्रमुख से लेकर स्थानीय प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई। दुर्गा की इस मुहिम में उनके किशोर समूह और ‘उड़ान’ परियोजना का सहयोग रहा। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने कहा, “बाल विवाह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह लड़कियों के विकास में एक बड़ी बाधा है। दुर्गा जैसी युवतियां समाज में बदलाव की अग्रदूत हैं। उनके प्रयासों से ही एक बाल विवाह मुक्त भारत का सपना साकार होगा।”

कई अन्य बच्चों को भी किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में दुर्गा सहित विभिन्न राज्यों के उन बच्चों को सम्मानित किया गया जिन्होंने बाल विवाह रोकने के लिए अपने-अपने समुदायों में अग्रणी भूमिका निभाई। इन बच्चों को अभियान के एम्बेसडर के रूप में नामित किया गया, ताकि वे बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज को शिक्षित करने में अहम भूमिका निभा सकें।

शिक्षा और सशक्तिकरण बनी बदलाव की कुंजी
बाल रक्षा भारत के सीईओ श्री शांतनु चक्रवर्ती ने इस अवसर पर कहा, “दुर्गा जैसे बच्चे हमें दिखाते हैं कि किस तरह शिक्षा और जागरूकता समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने में सहायक हो सकती है। उनकी कहानी हमें प्रेरित करती है कि हर लड़की को पढ़ाई का हक मिले और वह अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सके।” दुर्गा का यह साहसिक कदम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ जैसे अभियानों के उद्देश्यों को साकार करता है। उनके माता-पिता ने भी इस बदलाव को स्वीकारते हुए अपनी बेटियों की शिक्षा जारी रखने का फैसला किया है।

राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाने की योजना
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के इस अभियान में विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों का सहयोग है। इस पहल का उद्देश्य है कि समाज में जमीं हानिकारक परंपराओं को खत्म किया जाए और बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए। दुर्गा और उनके जैसे कई अन्य बच्चे, जो बदलाव की प्रतीक हैं, समाज को यह संदेश देते हैं कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए हर व्यक्ति को एकजुट होकर काम करना होगा।

 

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