संस्कृत कॉलेज और गोशाला मामले में चार महीने से चल रही है एक सप्ताह की जांच
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आवेदक गुड्डू का आरोप : आरोपी को बचाने में लगे हुए हैं जांच कमिटी
केबीआई| खगड़िया
जिले के हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार का मामला ठंडा होने के बजाय और ज्यादा तूल पकड़ने लगा है। अवध बिहारी संस्कृत महाविद्यालय रहीमपुर खगड़िया की जमीन और गोशाला मेला खगड़िया की बंदोबस्ती में व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत पर सामान्य प्रशासन विभाग बिहार के आदेश पर डीएम ने 27 सितंबर 2024 को दो सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच का जिम्मा सौंपा। उप विकास आयुक्त खगड़िया को जांच टीम के अध्यक्ष और एडीएम आरती को सदस्य बनाया गया। डीएम ने जांच टीम को एक सप्ताह में मंतव्य सहित जांच प्रतिवेदन सौंपने के लिए निर्देशित किया, ताकि सामान्य प्रशासन विभाग बिहार को जांच प्रतिवेदन भेज सके। उक्त मामले में उप विकास आयुक्त द्वारा परिवादी और आरोपी को नोटिस कर सुनवाई भी की गई। परिवादी के ओर से सभी साक्ष्य भी लिखित और मौखिक रुप से उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके बाबजूद भी लगभग चार माह बीतने के बाद भी जांच प्रतिवेदन नहीं सौंपा गया है। परिवादी का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग बिहार के द्वारा मार्च 2024 में हीं डीएम से जांच प्रतिवेदन की मांग की गई थी। लेकिन मामले को दबाकर रखा गया। पुनः सामान्य प्रशासन विभाग को शिकायत किए जाने पर संस्कृत महाविद्यालय और गोशाला प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित किया गया। गुड्डू ने बताया कि शुरु से हीं जांच के दौरान आरोपी एसडीओ को संरक्षण दिया जा रहा है। जब शुरु में हीं सभी प्रकार के साक्ष्य उपलब्ध करा दिया गया तो फ़िर जांच कमिटी डीएम को जांच प्रतिवेदन को क्यों नहीं सौप रहे हैं। इतना हीं नहीं जांच अवधि में हीं जांच कमिटी के अध्यक्ष सह उप विकास आयुक्त खगड़िया ने आरोपी एसडीओ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बन कर शिरकत किए। उसी समय से जांच कमेटी पर संदेह पैदा होने लगा। उन्होंने कहा कि नवंबर माह में अंतिम सुनवाई हुई थी। उक्त सुनवाई में जांच कमेटी ने संस्कृत महाविद्यालय और गोशाला कमेटी से लिखित जबाव मांगा था। उसके बाद मामला ठंडा बस्ता में चला गया था।
4 फरवरी को फिर सुनवाई के लिए दिया गया नोटिस
गुड्डू ने बताया कि जब उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं दिया गया और कुछ स्पष्ट नहीं बताया जाने लगा तो पुनः इसकी शिकायत किया गया, तब उप विकास आयुक्त खगड़िया के द्वारा फिर से 4 फरवरी को सुनवाई के लिए नोटिस दिया गया। उक्त तिथि में भी सुनवाई नहीं होने पर आवेदक ने उप विकास आयुक्त को ईमेल से पत्र भेजकर कहा कि 3 अक्टूबर से हीं जांच तथा साक्ष्य प्राप्त किया जा रहा है। लंबी प्रक्रिया के बाद भी जांच प्रतिवेदन तैयार नहीं होना खेदजनक है। पत्र में उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सुनवाई की तिथियां में लिखित साक्ष्य उप विकास आयुक्त को उपलब्ध कराया जा चुका है तथा मौखिक साक्ष्य भी दिया जा चुका है फिर साक्ष्य की मांग करना संदेह पैदा करता है कि मेरे द्वारा समर्पित सभी साक्षी को कहीं कचरे के डिब्बे में तो नहीं फेंक दिया गया।
आरोपित पदाधिकारी के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है जांच कमिटी
आवेदक ने यह भी कहा कि अवध बिहारी संस्कृत महाविद्यालय रहीमपुर खगड़िया के प्राचार्य द्वारा लिखित तौर पर उपविक विकास आयुक्त को बार-बार बताया जा रहा है कि जमीन बंदोबस्ती के रजिस्टर परवाना आदि आरोपित एसडीओ ने अपने पास नाजायज तरीके से रखा हुआ है फिर भी उप विकास आयुक्त के द्वारा एसडीओ से उक्त रेकर्ड की मांग नहीं करना इस आशंका को बल प्रदान करता है कि जांच कमिटी आरोपित पदाधिकारी के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है। इससे निष्पक्ष जांच की संभावना पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। आवेदक ने इस बात से सामान्य प्रशासन विभाग बिहार के प्रधान सचिव और डीएम को भी ईमेल के जरिए अवगत कराया है।
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